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Friday 29 October 2010

फूल और आदमी

बच्‍चे बस फूल को ही देखते

और फूल सा ही खिलते हैं

पॅखुडियो का कटीलापन भाता है किशोरो को

युवा खोजते है फूलो मे गंध

गंधमे भी सेर भर मादकता

इन सबसे अलग प्रौढ फूलो का अर्क बनाना चाह

े उन्‍हे पता है फूल पत्‍ते पराग बीज की सच्‍चाई

बिनदत्‍ता बुढवा हंसता है आख मून्‍द मून्‍द कर

बोलता है उंगली घूमा घूमा कर '' उसे क्‍या पता .........''

क्‍योंकि उसे सब कुछ पता है 

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