Labels

Followers

Monday 3 January 2011

सुनो विनायक सेन सुनो

नववर्ष व शनिवार का दिन
मैं भी पहुंचा दूमहली हनुमान जी के पास
वैसे तो मेरे गांव में कई हनुमान जी हैं
एक पोखरी के पास
एक पीपल के नीचे
बभनटोली के पास एक
व चमरटोली के पास एक था
कई मूर्तियां और आ गई है
जगह भी छेक ली गई है
परन्‍तु दूमहले हनुमान की कीर्ति ही कुछ और है
इसके पहले महल पर लूले,लंगडे,भीखमंगे थे लाईन लगाए
वे हनुमान जी से ज्‍यादा लडडू को खोज रहे थे
दूसरे महल पर ज्‍यादा शांति थी
यहां चारा,हवाला,कफन,संचार जैसे अनिवार्य सेवा से जुडे घोटालेवाज भक्ति में मगन थे
हनुमान जी के मुंह पर पर्दा था
कोई पुजारी ही यह हटा सकता था
अचानक हवा से हो गए हनुमान बेपरदा
उनके नथूने क्रोध से फूले हुए थे
किसी महान कष्‍ट से मुंह बन्‍द था उनका
विशाल गदा से झुक रहा था उनका कंधा
हनुमान को देखकर भी घोटालेबाज जमे रहे
कुछ नहीं बिगडने का दम्‍भ उसके चेहरे पर था
हनुमान जी चाहकर भी कुछ नहीं कर रहे थे

शायद वे डरे थे अपने पुजारी से 

या उस ठेकेदार से जो व्‍यवस्‍था करता है उनके भोग का
अब बताओ विनायक सेन
तुम्‍हारे रिहाई का अर्जी किसे दूं
जल्‍द ही जबावी चिटठी भेजो
हां चिटठी में सूरज तारे की बात मत करना

सरकार को पता है कि सूरज में एटम बम होता है
व बम से सब कुछ हिल जाता है 

शेष सब ठीक है 




No comments:

Post a Comment