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Sunday 10 February 2013

रवींद्र वर्मा की कविताएं



शावेज़ की चौथी चुनाव-विजय पर


शावेज ,‍मुबारक हो
तुमसे ज्‍़यादा
वेनेजुएला को
वेनेजुएला से ज्‍़यादा
लातिन अमेरिका को
लातिन अमेरिका से ज्‍़यादा
धरती को जो
घायल
कराह रही है

अपने चारो ओर गोल गोल
घूमती धरती घायल
थकी-सी लगती है
जैसे अमेरिका अचानक
बहुत भारी हो गया हो
उलार गाड़ी की तरह
उलार गाड़ी कब तक
उलार चलेगी


2 अमृत जयंती

यह अमृत जयंती की बात है:
मैंने अ को फोन किया-
उसने बताया कि उसका उपन्‍यास
कालजयी है ।
ब  ने कहा कि उसने
हिंदी कविता को वह दिया है जो
उसके पास नहीं था ।
स आलोचक था -उसने
सनातन फैसले दे दिए थे ।
सब अमर मरेंगे ।


मजा तब आया जब
मैंने पाया कि मैं भी
महान हूं ।फर्क
यही था कि मुझे यह भीतरी
फरेब पता था ।इसीलिए
मुझमें पेड़ की पत्‍ती की तरह
गिरने की उम्‍मीद
बाकी थी ।
(मासिक 'समकालीन सरोकार' जनवरी 2013 में)






(साभार 'समकालीन सरोकार' ,रवींद्र 
वर्मा 






























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